इनकी इस ख़िदमत और जज़्बे को सलाम..

डॉ शंकर गोवडा..........
यह जो दीवार से पीठ लगाये बैठे हैं इनका नाम है
डॉ. शंकर गोवडा !
रहते हैं कर्णाटक के मंड्या नामक जगह में ! इनकी ख़ास बात ये हैं की ये त्वचा रोग के डॉ हैं और अपने मरीजो से फीस के नाम पर मात्र 5 रुपये लेते हैं !
प्रतिष्ठित कलकत्ता मेडिकल कॉलेज से ग्रेजुऐट शंकर गोवड़ा का अपना कोई क्लिनिक भी नहीं , एक मित्र की दूकान के बगल में थोड़ी सी जगह में बैठे मिलते हैं डॉ साहब !
सबसे बड़ी बात यह है कि यह जो दवायें लिखते हैं वो सस्ती और असरकारक होती हैं ।
आज के दौर में जहाँ डॉक्टर्स के नाम से ही सैंकड़ों हज़ारों रुपयो के खर्च का ख्याल आता हो, एक मसीहा ग़रीबों के लिये काम कर रहा है ।
इनकी इस ख़िदमत और जज़्बे को सलाम ।।

Lions on Road



Lions on Road

शिवलिंग समंदर के भीतर ..



शिवलिंग समंदर के भीतर ..

ચાલીસ પછી ..



ચાલીસ પછી ..

કર્પૂર ગવરમ :( कर्पूरगौरं मंत्र )

કર્પૂર ગવરમ :

जानिए आरती के बाद क्यों बोलते हैं कर्पूरगौरं मंत्र
किसी भी मंदिर में या हमारे घर में जब भी पूजन कर्म होते हैं तो वहां कुछ मंत्रों का जप अनिवार्य रूप से किया जाता है, सभी देवी-देवताओं के मंत्र अलग-अलग हैं, लेकिन जब भी आरती पूर्ण होती है तो यह मंत्र विशेष रूप से बोला जाता है l

कर्पूरगौरं मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।
ये है इस मंत्र का अर्थ

इस मंत्र से शिवजी की स्तुति की जाती है। इसका अर्थ इस प्रकार है-
कर्पूरगौरं- कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले।
करुणावतारं- करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं।
संसारसारं- समस्त सृष्टि के जो सार हैं।
भुजगेंद्रहारम्- इस शब्द का अर्थ है जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं।
सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभावनी सहितं नमामि- इसका अर्थ है कि जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं, उनको मेरा नमन है।
मंत्र का पूरा अर्थ-
जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव माता भवानी सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करें और उन्हें मेरा नमन है।
यही मंत्र क्यों….
किसी भी देवी-देवता की आरती के बाद कर्पूरगौरम् करुणावतारं….मंत्र ही क्यों बोला जाता है, इसके पीछे बहुत गहरे अर्थ छिपे हुए हैं। भगवान शिव की ये स्तुति शिव-पार्वती विवाह के समय विष्णु द्वारा गाई हुई मानी गई है। अमूमन ये माना जाता है कि शिव शमशान वासी हैं, उनका स्वरुप बहुत भयंकर और अघोरी वाला है। लेकिन, ये स्तुति बताती है कि उनका स्वरुप बहुत दिव्य है। शिव को सृष्टि का अधिपति माना गया है, वे मृत्युलोक के देवता हैं, उन्हें पशुपतिनाथ भी कहा जाता है, पशुपति का अर्थ है संसार के जितने भी जीव हैं (मनुष्य सहित) उन सब का अधिपति। ये स्तुति इसी कारण से गाई जाती है कि जो इस समस्त संसार का अधिपति है, वो हमारे मन में वास करे। शिव श्मशान वासी हैं, जो मृत्यु के भय को दूर करते हैं। हमारे मन में शिव वास करें, मृत्यु का भय दूर हो।
ॐ नमः शिवाय

When your children desire..



When your children desire 
to talk to you and share their problems with you, 
stop everything and listen to them. 
There is nothing more important than that.

पृथ्वी मुद्रा के कुछ प्रयोग और फायदे ..




sorry..

Vipul Dave's photo.

સસરા એ જવાબ આપ્યો ..

पापा चाय ..